
सर्पदंश मुआवजा घोटाले में बड़ा धमाका: डॉक्टर के बाद SDM-तहसीलदार के 3 बाबू गिरफ्तार, 17 करोड़ की लूट का खुलासा
431 फर्जी सर्पदंश मौतें दिखाकर करोड़ों का मुआवजा हड़पा, तहसील से लेकर अस्पताल तक फैले सिंडिकेट पर पुलिस का शिकंजा, अब तक 14 FIR और कई गिरफ्तारियां।

बिलासपुर | जीशान अंसारी की रिपोर्ट छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में सर्पदंश से मौत के नाम पर हुए 17.24 करोड़ रुपये के कथित मुआवजा घोटाले में पुलिस लगातार बड़ी कार्रवाई कर रही है। फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट बनाने के आरोप में महिला डॉक्टर की गिरफ्तारी के बाद अब जांच की आंच राजस्व विभाग तक पहुंच गई है। पुलिस ने SDM कार्यालय और तहसील कार्यालय के तीन बाबुओं को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। आरोप है कि इन कर्मचारियों ने फर्जी सर्पदंश प्रकरण तैयार कर सरकारी मुआवजा दिलाने में अहम भूमिका निभाई।
इस हाई-प्रोफाइल मामले में अब तक 14 एफआईआर दर्ज हो चुकी हैं और जांच के दायरे में डॉक्टर, वकील, बैंककर्मी, राजस्व कर्मचारी और बिचौलियों का पूरा नेटवर्क आ चुका है। एसएसपी रजनेश सिंह स्वयं जांच की निगरानी कर रहे हैं।

जांच में सामने आया कि जहां जशपुर जिले में तीन वर्षों में केवल 96 सर्पदंश मौतें दर्ज हुईं, वहीं अकेले बिलासपुर में 431 मौतें दिखाकर 17.24 करोड़ रुपये का मुआवजा जारी कर दिया गया। विधानसभा में मामला उठने के बाद इसकी उच्च स्तरीय जांच शुरू हुई।
रविवार को गिरफ्तार किए गए कर्मचारियों में SDM कार्यालय के बाबू नरेंद्र कौशिक, गरीब राम बिंझवार और तहसीलदार कार्यालय के क्लर्क हरिशंकर राठौर शामिल हैं। पुलिस का आरोप है कि इन लोगों ने अपने लॉगिन आईडी से फर्जी रिपोर्ट तैयार कर सरकारी मुआवजा स्वीकृत कराया।

इससे पहले पुलिस सिम्स की तत्कालीन डॉक्टर प्रियंका सोनी, तहसील कार्यालय से जुड़े चालक गोविंद विश्वकर्मा, अधिवक्ताओं और अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार कर चुकी है। जांच एजेंसियों के अनुसार, तहसीलदार का चालक गोविंद विश्वकर्मा इस पूरे गिरोह का प्रमुख संचालक था, जिसने राजस्व कर्मचारियों और अन्य लोगों के साथ मिलकर फर्जी दस्तावेज तैयार कर करोड़ों रुपये का सरकारी धन हड़पने का षड्यंत्र रचा।
पुलिस के अनुसार, कई मामलों में मृतकों की वास्तविक मौत किसी अन्य कारण से हुई थी, लेकिन फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट और दस्तावेज तैयार कर उन्हें सर्पदंश से मौत दर्शाया गया। कुछ मामलों में तो परिजनों की जानकारी के बिना ही मुआवजे की राशि निकालकर बंदरबांट किए जाने की भी आशंका है।
फिलहाल इस पूरे मामले में 17 संदिग्ध प्रकरणों की गहन जांच जारी है। पुलिस की रडार पर कई डॉक्टर, राजस्व अधिकारी और अन्य कर्मचारी हैं। वहीं इस कथित घोटाले का मास्टरमाइंड बताए जा रहे अधिवक्ता श्रवण वस्त्रकार की तलाश जारी है।















